Online Astrology,Palm Reading, Vastu,Numerology,Vaidik Astrology, Numerology, Palmistry, Vastu, Lal Kitab, KP Astrology, Medical Astrology, Celebrity Horoscopes, Annual and Monthly Horoscope, Rashifal, Movies, Cricket and movies prediction etc

Breaking

Showing posts with label Life Motivation. Show all posts
Showing posts with label Life Motivation. Show all posts

Monday, November 18, 2019

November 18, 2019

Break up aur toote huye dil se kaise niklein?

इस प्रश्न से आजकल बहुत से युवा जूझ रहे हैं। एक तरफ़ा प्यार या फ़िर बेवफाई या ब्रेकअप से बहुत लोगों का केवल दिल नहीं टूटता, बल्की वो लोग खुद भी टूट जाते हैं।

“ये इश्क़ नहीं आसान बस इतना समझ लीजिये,
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है।

जब इश्क़ मे टूटे हुए दिल के दौर से आप गुजर रहे हों, तो आप निम्न में से किसी एक मार्ग पे चल सकते हैं:

१. वहशत- ए- दिल को अपनी जिंदगी बना लेना। वहशत, अर्थात् एक पागलपन या मानसिक विक्षिप्त होने की अवस्था है। इस अवस्था में आपके लिए दुनिया का कोई मतलब नहीं रह जाता है। आपकी दुनिया एक मात्र वो है, जिसको आप प्यार करते हैं। आप उसी के ख्यालों में डूबे रहते हैं। दुनिया आप पर हँसती है तो हंसती रहे, आपके लिए इसका कोई मायने नहीं होता। आपकी सोच होती है, ' अगर तुम नहीं हो तो कुछ भी नहीं है’। ऐसे व्यक्तियों का जन्म ही इस वहशत में ही जीने के लिए होता है। जैसे मीरा, भगवान कृष्ण के प्यार में जीवन जीती है। हीर-राँझा, लैैला-मजनू ये भी इसमें आते हैं। हीर की दरगाह भी लोग इसलिए जाते हैं कि वो लोग भी सोचते हैं, काश उनकी प्रेमिका हीर जैसी हो या उनका प्रेमी राँझा जैसा हो। बॉलीवुड का उदाहरण ले तो सुरैया और देव आनंद साहब, देव आनंद साहब शादी करके अपनी जिंदगी जीने लगे लेकिन सुरैया ने कभी शादी नहीं की। अभिनेत्री तब्बू जी का भी नाम ले सकते हैं, उन्हें भी अभिनेता नागार्जुन से प्यार है पर उनकी शादी नहीं हुई और अब तो नागार्जुन के बेटे की भी शादी हो चुकी है। ये लोग भी हमारे समाज मे होते हैं।

२. आप एक अल्गोरिथम् बना सकते हैं, कि क्या क्या संभावनाएं हैं, उन्हें पाने की। जैसे आजकल अधिकतर cases में एक अच्छा career या wealth भी आपको, आपका प्यार दिला सकता है। रुको नहीं जूझ जाओ।

३. सन्यास: बहुत से लोग प्यार में असफल हो जाने के बाद सन्यास में भी चले जाते हैं। जैसे अभिनेत्री लारा दत्ता के साथ नौ साल तक प्यार के रिश्ते में केली डोरजी रहे। केली डोरेजी भी एक अभिनेता था, don no 1 और बद्रीनाथ जैसे superhit movie के main villain हैं। लारा दत्ता तो दूसरे से शादी करके जीवन जीने लगी। कैली दोरजी अब एक बौद्ध सन्यासी हैं।

४. एक तरफ़ा प्यार और दिल टूट जाना भी बहुत बड़ी समस्या है। ऐसा क्यूँ होता है, इसके लिएआपको एक कहानी सुनाता हूँ(मानो या ना मानो): एक क्षत्रिय राजा का पुत्र था जिसकी राज पाठ के काम में कोई रुचि नहीं थी। उसका एक लड़की से प्रेम था। दोनो ने शादी कर ली। बहुत दिनों वो साथ रहे, लेकिन लड़का का मन हमेशा परेशान रहता है। अनेकों परिस्थितियाँ ऐसी निर्मित हुई की वो सत्य की खोज मे घर छोंड़ कर चला गया। उसने सत्य प्राप्ति के लिए बहुत संघर्ष किया और अन्ततः उसे अपने उस मार्ग में उपलब्धि मिल गई। इधर उसकी पत्नी ने अपने पति के वियोग मे अपना जीवन खपा दिया। जब वो मृत्यु की अवस्था में थी, तो वो बार बार सोच रही थी, मैंने बहुत गलत इंसान से शादी की और उसकी उस नफरत की अवस्था में ही मृत्यु हो गयी। इधर उसके पति को जब सत्य का ज्ञान हुआ तो उसे ये एहसास हुआ कि उसने अपनी पत्नी को छोंडकर बहुत गलती कर दी। वो सत्य को गृहस्थ में रहते हुए भी पा सकता था। उसके मन में पछतावा था, वो उसकी भरपाई करना चाहता था और उसे मृत्यु के बाद मोक्ष नहीं मिला। दोनों का अगला जन्म हुआ। इस जन्म में जब लड़का का सामना उस लड़की से हुआ, वो उसके प्यार में पड़ गया। उसके आँगे पीछे घूमता रहा। ऐसा वो कयी सालों तक करता रहा। लेकिन लड़की ने उसको स्वीकार नहीं किया। ये पिछले जन्म का कर्मों का हिसाब था। उस लड़की को अपने पिछले जनम का बदला जो लेना था और उन्हे पिछले जन्म का ज्ञान भी नहीं। हमें जो मिल रहा है, वो हमारे कर्मों का ही जोड़ है। हर कोई व्यक्ति इस बात को माने या ना माने, ये उस पर है। लेकिन आप सब अपना पिछला जन्म नहीं देख सकते।

इस field में कोई भी समस्या हो, कुछ नकरात्मक बातें आपके दिमाग में आती हैं: मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी, मैनें गलत इंसान से प्यार किया, मैं उस व्यक्ति से बदला कैसे लूँ आदि आदि। अगर आप इस टूटे हुए दिल की अवस्था से जूझ रहे हैं, तो इस अवस्था से निकलने का सबसे बेहतरीन उपाय है, अपने आप को माफ कर दें अगर अपने को दोषी मानते हैं। अगर आपको लगता है कि सामने वाला दोषी है तो उस व्यक्ति को भी माफ कर दो। ये मत सोचो कि उसने आपको कितना hurt किया, अब बस उसे माफ कर दो। इससे बढ़कर कोई दुसरा उपाय नहीं है। आपके हाँथ में प्यार और नफ़रत दोनो है, आप केवल प्यार करो।

द्वारा
लवलेश गौतम

Tuesday, November 20, 2018

November 20, 2018

मनुष्य पशु से कैसे श्रेष्ठ है?

यदि एक दृष्टि से देखा जाए तो कुछ भी भिन्नता नहीं है अौर यदि दूसरी दृष्टि से देखा जाए तो बहुत भिन्नता है ।

अाहार, निद्रा, भय एवं मैथुन के स्तर पर दोनों समान हैं अर्थात् दोनों ही भोजन करते हैं, विश्राम हेतु सोते हैं, भय को दूर करने के लिए अपने बचाव के लिए अनेक उपाय करते हैं अौर दोनों मैथुन का भोग करते हैं ।

हाँ उनकी इन क्रियाअों का स्थान अौर तरीका इत्यादि भिन्न हो सकता है किन्तु फिर भी क्रिया तो समान ही है अौर इन चारों क्रियाअों का उद्देश्य भी समान ही है ।

तो फिर अन्तर क्या है दोनों में? अन्तर तो तभी अाता है जब धर्म बीच में अाता है, महाभारत में बताया गया है,

"अाहार निद्रा भय मैथुनं च
समन्यमेतद् पशुभिर्नराणाम् ।
धर्मो हि तेषांऽधिको विशेषो
धर्मेणा हीन पशुभिर्समानाम् ।।"

धर्म ही है जो मानव जीवन को विशेष बनाता है अन्यथा धर्म के बिना तो मानव जीवन पशु जीवन के ही समान है क्योंकि धर्म के अभाव व्यक्ति अपना सम्पूर्ण जीवन इन चार चीजों की अापूर्ति में ही बिता देता है ।

तो यहाँ किस प्रकार के धर्म की बात हो रही है? यहाँ बात हो रही है स्वयं के धर्म को समझने की । स्वयं को समझने की । मैं कौन हूँ? मेरे जीवन में अनेक प्रकार के दु:ख क्यों अा रहे हैं? क्या इन दु:खों को हमेशा-हमेशा के लिए रोका जा सकता है?
पशुअों के जीवन में इन समस्याअों का हमेशा के लिए समाधान करने की सुविधा नहीं है अौर उनके पास जो बुद्धि है भी वह केवल खाने, सोने इत्यादि के लिए ही प्रयोग होती है । जैसे कि बिल्ली को इस बात की बुद्धि है कि धीरे से रसोई में जाकर दूध पीना है, चिड़िया को घोसला बनाने की जटिल तकनीक की बुद्धि है अौर शेर को पता है कैसे अौर कब उसे अपना शिकार करना है ।

अौर यदि मानव भी अपनी बुद्धि का प्रयोग केवल इन्हीं शारीरिक क्रियाअों को बेहतर बनाने के लिए करेगा तो वह पशु समान ही रह जायेगा ।

मानव तो मानव तभी बनता है जब वह अपनी बुद्धि अौर समय का प्रयोग स्वयं की मूलभूत समस्यायें जैसे कि जन्म, मृत्यु, बुढ़ापा अौर बीमारी को समझने, अपने अौर भगवान् के अस्तित्व को जानने तथा परम एवं शाश्वत् सुख की प्राप्ति के लिए करता है ।

 प्रत्येक पशु में कुछ न कुछ ऐसा है, जो मनुष्य को कहीं पीछे छोड़ देता है। कोई रात में भी देखता है, कोई उड़ता है, कोई तैरता है। यह भी की पशु को चलना, बोलना, खाना आदि भी सिखाने की उतनी आवश्यकता नहीं मालूम होती।

और पशु में ही क्यों, वृक्षों में, यहाँ तक की पत्थर, पहाड़, हवा, पानी, सब किसी ना किसी बात में मनुष्य से श्रेष्ठ हैं। रेगिस्तान की नदी के किनारे खड़े पेड़ की जड़ों को भी मालूम है कि पानी इधर है या उधर।

फिर भी असल बात है कि "बड़े भाग मानुष तन पावा"। क्यों?

'ज्ञान' और 'विज्ञान' में क्या भेद है ? यदि इस पर विचार करें तो आप यह जान पाएँगे कि 'ज्ञान' में वि जुड़ने पर 'विज्ञान' अस्तित्व में आता है सरल शब्दों में 'ज्ञान' के पीछे - पीछे 'विज्ञान' चलता है। विज्ञान पशु और मानव को समरूप बताता है वही आहार, निद्रा, क्रोध, भय और मैथुन इन लक्षणों विषयों के बोझ तले दबा हुआ प्राणी। जबकि ज्ञान हमें बताता है - 'बड़े भाग्य मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सद ग्रंथन गावा।' पशु एक आयामी या द्विआयामी होता है। परंतु मानव बहुआयामी होता है वह एक साथ अनेक चीजों को कर सकता है। इसी कारण वह अपने मूल लक्ष्य से दूर होकर अनेकों प्रपंचों में फंसा रहता है।

देखो पशु में एक ही आयाम है, वो यह कि वे जो हैं, जैसे हैं, बस हैं। अपनी सीमित शक्तियों को भोग के निमित उपयोग करने के सिवा, कोई चारा उनके पास नहीं है।

पर मनुष्य कमजोर भले ही लगे, लेकिन दो आयामी है, माने वो जो है, वो तो है ही, वह कुछ और भी हो सकता है। अपनी विलक्षण बुद्धि के उपयोग से वह तो परमात्मा तक भी पहुँच सकता है।

ऐसे समझो, गुलाब की झाड़ी में काँटे, फूल से, संख्या में भी अधिक हैं, उनका प्रभाव भी अधिक है, आयु भी। नाजुक फूल की काँटों के सामने औकात नहीं है, फिर भी फूल में कुछ है जो काँटे में नहीं है, तभी वह झाड़ी कैक्टस नहीं, गुलाब कहलाती है, माने उस पौधे की पहचान काँटे से नहीं फूल से की जाती है।

ऐसे ही, एक लाख गुण हों तो भी पशु पशु ही है, मनुष्य कहीं श्रेष्ठ है। उसके पास मुक्ति की संभावना नहीं, मनुष्य के पास अनन्त संभावना है।

मूल बात, जो मनुष्य मुक्त होने का प्रयास नहीं करता, कमाना, खाना, पैखाना ही जिसके जीवन का लक्ष्य है, जो आहार, निद्रा, भय, मैथुन में ही अपने कर्तव्य की इतिश्री मान रहा है, वह तो पशु भी कहलाने का अधिकारी नहीं, वह तो पशु से भी गिरा हुआ है।